ननिहाल से मेरा गहरा रिश्ता रहा है .आज पहली बार ननिहाल तब गया जब नाना भी नहीँ रहे .नानी तो पहले ही दिवंगत हो चुकी थीं .पिछली बार जब गया था दिसम्बर माह में तो नाना जी उठ कर आये यह देखने कि थाली में क्या परसा गया है ?फिर आलमारी से 500/के दो नोट दिये .बचपन बीता नाना के सानिध्य में .मुझे छठी में पहुँचने परसायकिल नाना ने ही दिया था .नाना के साथ रहकर उनके न रहने की कल्पना में खूब रोता था .आज उनके न रहने पर जब गया तो बचपना याद आगया .हमने एक नीम का पौधा लगाया था .आज उसी नीम और कुआँ के पास खड़े होकर कुछ याद आ रहा था कुछ भूलने की कोशिश कर रहा था .