आज 24 अप्रैल को भारत पंचायतीराज दिवस मनाता है।इसकी शुरुआत आज ही के दिन सन 1993 में 73वें संविधान संशोधन के साथ हुई।दरअसल बापू ने ग्राम स्वराज का सपना देखा था और वे मानते थे कि अगर देश के गांवों के ऊपर खतरा पैदा हुआ तो भारत को खतरा होगा।पंचायतीराज व्यवस्था को लागू करने के पीछे यही सोच काम कर रही थी।इसका मक़सद गांव को आत्मनिर्भर बनाना और पूर्ण स्वायत्तता देना था जिससे लोकतंत्र निचले स्तर पर भी पल्लवित पुष्पित हो।असली भारत तो यहां के गांवों में ही बसता है।ब्रिटिश शासक भारत के इन आत्मनिर्भरता के केंद्रों को पूर्णतया विनष्ट करना चाहते थे जिसका आधार बनी 1830 में गवर्नर जनरल सर चार्ल्स मेटकाफ की रिपोर्ट।चार्ल्स मेटकाफ के मुताबिक भारत के ग्राम समुदाय एक प्रकार के छोटे छोटे गणराज्य हैं जो अपने लिए आवश्यक सभी सामग्री की व्यवस्था कर लेते हैं तथा किसी प्रकार के बाहरी सम्पर्क से मुक्त हैं।इस बात को समझकर भारत के गांवों को तबाह करने में अंग्रेज काफी हद तक कामयाब रहे उनके जाने के बाद अपने को गांधी का अनुयायी मानने वाले सत्ता सम्हाले लेकिन गांव की बदहाली बनी रही।आज देश में पंचायती राज व्यवस्था लागू है।लगभग देश की सभी पंचायतें ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जुड़ गई हैं।गांव का सरपंच सीधे अपने प्रदेश या देश के नेतृत्व के साथ आज सहजता से संवाद स्थापित कर रहा है।अपने गांव की जरूरत के मुताबिक मुखिया केंद्र या प्रदेश नेतृत्व से परामर्श कर स्थानीय संसाधनों का सही और समुचित प्रयोग कर सकता है।आज बदलाव तो जरूर दिखाई दे रहा है लेकिन यह काफी नहीं है।गांव में शिक्षा, चिकित्सा,और रोजगार के अवसर का उचित प्रबंध करने की आवश्यकता है।आज सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में गांव ही हैं।यह बात जरूर है कि गांव को भी अपने सरपंच या प्रधान चुनने में तथा अपनी प्राथमिकता तय करते समय गांव की आत्मनिर्भरता और स्वायत्तता को ही प्रथम वरीयता देना होगा।हमारी ग्रामसभाएं राजनीति का अखाड़ा बन गई हैं जहां प्रधान या सरपंच का चुनाव लोकतंत्र का पर्व न होकर गांव पर कब्जा करने का अवसर बन जाया करता है। जिस प्रकार ब्लाक प्रमुख और जिलापंचायत के अध्यक्ष का चुनाव सम्पन्न होता है वह किसी से छिपा नहीं है। उसे देखकर यह संशय पैदा होना स्वाभाविक है कि क्या यही परिकल्पना रही होगी पंचायतीराज व्यवस्था का ख़ाका तैयार करते समय?गांव खुशहाल हों,वाद का निबटारा संवाद से हो, आत्मनिर्भरता बढ़े और पलायन रुके इसी आकांक्षा के साथ सभी पंचायत प्रतिनिधियों को दिन विशेष की बधाई।
डॉ. सन्तोष कुमार मिश्र
पी.जी.कालेज,भुड़कुड़ा,गाजीपुर



