Tuesday, 22 March 2016

डा.लोहिया और भगत सिंह :समाजवाद के स्वप्नदृष्टा

आज का दिन बहुत महत्व का है .देश में होली के साथ डा.लोहिया का जन्मदिन और शहीदे आज़म भगत सिंह का शहादत पर्व मनाया जा रहा है .23मार्च को भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी गयी और 23.मार्च लोहिया जी का जन्मदिन भी है .आजादी के 68साल बाद भी भगत सिंह के विचारों की ताकत और ताजगी बनी हुई है .भगत सिंह ने इस बात को महसूस किया कि धर्म जब राजनीति से घुलमिल जाता है तो वह एक घातक बिष बन जाता है .भाई को भाई से लडाता है जनता के हौंसले को पस्त करता है असली दुश्मन की पहचान मुश्किल कर देता है .अन्याय अत्याचार शोषण राजनीति धर्म और उसके पाखंड पर प्रहार करते हुये उनके क्रान्तिकारी विचार को देश के सम्मुख लाने के लिये यही उपयुक्त समय है .
डा.लोहिया और भगत सिंह का उद्देश्य एक था दोनो शोषण विहीन समता -मूलक समाज के स्वप्नदृष्टा थे .दोनो कलम और किरदार के धनी थे .भले ही लोहिया को कुजात गाँधीवादी कहा जाता है लेकिन जापानी चिंतक यशिका होशिनो के अनुसार विकासोन्मुख गाँधीवाद के सही -सही उतराधिकारी लोहिया ही हैं .होली की बधाई के साथ देश के सपूतों को नमन .

Monday, 8 February 2016

ननिहाल की स्मृतियां

ननिहाल से मेरा गहरा रिश्ता रहा है .आज पहली बार ननिहाल तब गया जब नाना भी नहीँ रहे .नानी तो पहले ही दिवंगत हो चुकी थीं .पिछली बार जब गया था दिसम्बर माह में तो नाना जी उठ कर आये यह देखने कि थाली में क्या परसा गया है ?फिर आलमारी से 500/के दो नोट दिये .बचपन बीता नाना के सानिध्य में .मुझे छठी में पहुँचने परसायकिल नाना ने ही दिया था .नाना के साथ रहकर उनके न रहने की कल्पना में खूब रोता था .आज उनके न रहने पर जब गया तो बचपना याद आगया .हमने एक नीम का पौधा लगाया था .आज  उसी नीम और कुआँ के पास खड़े होकर कुछ याद आ रहा था कुछ भूलने की कोशिश कर रहा था .

Thursday, 21 January 2016

प्रख्यात समाजवादी जनेश्वर मिश्र की पुण्यतिथि आज

आज जनेश्वर जी की पुण्यतिथि है .देश उन्हे छोटे लोहिया के रूप में जनता और मानता है .राजनीतिक सफ़र में उनके साथ रहने वाले लोगों का कहना है कि जनेश्वर जी बनियान नहीं पहनते थे .एक बार नेताजी ने उनसे पूछा आप बनियान नहीं पहनते हैं क्या कारण है ?जनेश्वर जी ने कहा गरीब के पास एक कपडा नहीं है मैं कुर्ता और बनियान दोनो कैसे पहन सकता हूँ .जनेश्वर जी ने इलाहबाद से राजनीति की शुरुवात की .अंतिम साँस भी आंदोलन के दौरान इलाहबाद में ली .जनपक्ष के हिमायती ,गरीबी और गैरबराबरी के खिलाफ़ जीवन भर संघर्ष करने वाले नायक को श्रद्धांजलि .

Friday, 8 January 2016

पठानकोट के बहाने पड़ताल रिश्तों की

देश ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ से इसे न तो युध्द में झोंका जा सकता है न ही युध्द का न्यौता स्वीकार करना उचित होगा .सवाल यह है कि फ़िर किया क्या जाय ?समाधान स्थायी हो और नुकसान न्यूनतम हो इस फार्मूले पर कम करना होगा . शरीफ़ साहब अगर आतंकवाद से पीडित पाकिस्तान और पडोसी भारत के प्रति फिक्रमंद हैं तो अपनी ज़मीन पर फंडिंग बँद करना होगा नही तो यह समझा जयेगा कि यह प्रायोजित है .दोनो देश अपने आंतरिक सिस्टम को जब दुरुस्त कर लेंगे तो बिना लड़ाई के समस्या हल हो जयेगी .अन्यथा पाक सरकार प्रायोजक की भूमिका में समझी जयेगी भारत की सरकार को भी देश विरोधी ताकतों के आर्थिक उपक्रम पर प्रहार करना होगा .आतंकवाद को दी जाने वाली आर्थिक मदद को रोककर दोनो देश ही नहीं विश्व इस समस्या से बच सकता है .जोश में आकर देश और दुनियाँ को युध्द के हवाले करना कहीं से उचित नही होगा .शाल भेंट करना साथ साथ जन्मदिन में शरीक होना तभी सार्थक है जब दिल से तुला जाय .दोनो देश के लोग अमन पसंद हैं इसमे कोई शक नही लेकिन वक़्त आ गया है सरकारों को यह समझ आये .

Thursday, 7 January 2016

प्रदूषण से निपटने की देश और दुनियाँ की तैयारी .

दिल्ली में प्रदूषण को लेकर चिंता जगजाहिर है केजरी सरकार समाधान के प्रयास में लगी है .यह समस्या जीव जगत की है लेकिन पैदा मनुष्य द्वारा की गयी है .समाधान भी मनुष्यों को निकलना होगा .विकास के नाम पर हमने अपने साथ पशु -पंछी वनस्पतियों को बहुत नुकसान पहुँचाया है .नेता और नीतियां अगर पर्यावरण की सुध लें तो संकट से बचा जा सकता है .जो लोग जितने ही शक्ति सम्पन्न हैं वो पर्यावरण को रौंद रहे हैं .समारोह के नाम पर प्रदर्शन कर कृत्रिम रोशनी और चमक दमक से अमीर लोग पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहे है .हम लोगों को समझा बता कर प्रदूषण की रोक थाम के लिये प्रेरित कर सकते हैं .

सोशल मीडिया :अभिव्यक्ति का नया दौर

सोशल मीडिया अभिव्यक्ति के सशक्त माध्यम के रूप में तेजी से जगह बना रहा है .कुछ लोग इसका उपयोग गलत तरीके से भी कर रहे हैं जिससे समाज में भ्रांति फैलने का खतरा बना रहता है .वैचारिक मतभेद को व्यक्त करने के लिये गाली -गलौज का प्रयोग वर्जित होना चाहिये .हम जो -कुछ भी शेयर करें वह पुष्ट और प्रमाणिक हो वैचारिक धरातल पर हम भिन्न -भिन्न विचारों से परिचित हों उसका सम्मान करना सीखे तथा जुड़ाव हो .यह करके हम नज़दीक तो आयेंगे ही साथ साथ विश्वा ग्राम की संकल्पना सार्थक होगी .