आज का दिन बहुत महत्व का है .देश में होली के साथ डा.लोहिया का जन्मदिन और शहीदे आज़म भगत सिंह का शहादत पर्व मनाया जा रहा है .23मार्च को भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी गयी और 23.मार्च लोहिया जी का जन्मदिन भी है .आजादी के 68साल बाद भी भगत सिंह के विचारों की ताकत और ताजगी बनी हुई है .भगत सिंह ने इस बात को महसूस किया कि धर्म जब राजनीति से घुलमिल जाता है तो वह एक घातक बिष बन जाता है .भाई को भाई से लडाता है जनता के हौंसले को पस्त करता है असली दुश्मन की पहचान मुश्किल कर देता है .अन्याय अत्याचार शोषण राजनीति धर्म और उसके पाखंड पर प्रहार करते हुये उनके क्रान्तिकारी विचार को देश के सम्मुख लाने के लिये यही उपयुक्त समय है .
डा.लोहिया और भगत सिंह का उद्देश्य एक था दोनो शोषण विहीन समता -मूलक समाज के स्वप्नदृष्टा थे .दोनो कलम और किरदार के धनी थे .भले ही लोहिया को कुजात गाँधीवादी कहा जाता है लेकिन जापानी चिंतक यशिका होशिनो के अनुसार विकासोन्मुख गाँधीवाद के सही -सही उतराधिकारी लोहिया ही हैं .होली की बधाई के साथ देश के सपूतों को नमन .
डा.लोहिया और भगत सिंह का उद्देश्य एक था दोनो शोषण विहीन समता -मूलक समाज के स्वप्नदृष्टा थे .दोनो कलम और किरदार के धनी थे .भले ही लोहिया को कुजात गाँधीवादी कहा जाता है लेकिन जापानी चिंतक यशिका होशिनो के अनुसार विकासोन्मुख गाँधीवाद के सही -सही उतराधिकारी लोहिया ही हैं .होली की बधाई के साथ देश के सपूतों को नमन .