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| विश्व पर्यावरण दिवस आज |
जब हम कोई दिवस मनाते हैं तो उस दिन विशेष पर अपना ध्यान खास मुद्दे पर केंद्रित करके चिंतन करते है।आज विश्व पर्यावरण दिवस है।और कहना गलत न होगा कि सबको दुनियां की चिंता है और सबसे दुनियां को चिंता।किसी को कुछ सूझ नहीं रह है।हालत बद से बदतर हो गए हैं।कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के चलते आदमी तो मारा मारा फिर ही रहा है उसकी छोड़िये,भूतों तक को उसने अपनी करतूतों से बेघर कर दिया है । कितनी अजीब बात है न भूतों के बारे में बतियाना, संचार क्रांति के इस युग में लेकिन यक़ीनन यह सच है कि भूत बेघर हो गए हैं।उनका ठिकाना छिन गया है।विश्व पर्यावरण दिवस से भूतों का क्या सम्बन्ध ?यह बात तो सहज ही मन में आएगी।लेकिन सम्बन्ध हैऔर प्रगाढ़ सम्बन्ध है।सघन वन ,जंगल, निर्जन स्थान ,नदी ,पोखर ,तालाब यहीं तो होता था भूतो का अड्डा ठिकाना जहां दिन में भी आदमी सामान्यतया अकेले जाने में भय खाता था ।लेकिन आज इन जगहों का अतापता नहीं।जो व्यक्ति जितना अधिक विकसित होने का दम्भ पाले है वह अपनी खास तरह की जीवन शैली के कारण पर्यावरण के लिए उतना ही अधिक हानिकारक है।पेड़ों की अन्धाधुन्ध कटाई ने वीरान बना दिया धरती को।और हम सभ्य होने का दम्भ लिए घूमते फिर रहे हैं।हमारी हबस ने कितनों को बेघर कर दिया ,कितने विलुप्त हो गए और खुद के जीवन को भी अधर में लटका दिया है।उधार का जीवन कब तक चलेगा।सोचना तो पड़ेगा कि हमने क्या कमाया और क्या छोड़ जायेंगे।हमारे पुरखों ने हमको जो चीज़ सहेज के दिया क्या हम अपनी आने वाली पीढ़ी को देने में सक्षम रहेंगे अंत तक।शायद नही!तो क्यों हम हम कहि धन धाम संवारने में लगे हैं जब अंत समय में खाली हाथ जाना है।गिद्ध कौवा गौरैया को तस्वीरों में हमारे बच्चे देख पाएंगे ।सियार को मानव बस्ती में देख मारो मारो का शोर मचता है लेकिन क्यों ?पेड़ों को काटकर हमने ही तो उसे बेघर कर मानव बस्ती में घूमने को मजबूर किया है।गाल बजाने से समस्या का कहीं भला समाधान निकलता है।समाधान तो निकलेगा सोचने समझने और महसूस करने से।दोस्त और दुश्मन के अंतर को समझने से।क्षणिक आनंद की जगह परम् आनंद की ओर उन्मुख होने से।मेरा आशय कंक्रीट के जंगलों का मोह त्यजने से है।प्रकृति के साथ दोस्ताना रवैये से है।और तब हम बेहद खूबसूरत दुनियां से नाता जोड़ पाएंगे।अगर कुछ धनात्मक करने में हम सक्षम नहीं हैं तो जस का तस तो छोड़ ही सकते हैं धरा को।यह भी क्या कम है!तो फिर आइये आज के दिन एक संकल्प लिया जाय कि इस खूबसूरत आशियाने को न तो उजाड़ेंगे और न ही उजड़ने देंगे।होली दीवाली ईद क्रिसमस पर नकली घरों को सजाने और साफ सुथरा करने से हमें कौन रोक रहा लेकिन यह धरती हरी भरी और साफ-सुथरी रहे वर्षपर्यन्त इसको सुनिश्चित करना हमारा दायित्व है।धरती का सौन्दर्य सदा सर्वदा बना रहेगा तभी जीवन का प्रवाह भी अनवरत धरा पर रहेगा और मानव सभ्यता अक्षुण्य बची रहेगी।बाढ़, सूखा, भूकम्प जैसी प्रकृतिक आपदा और कोरोना जैसी महामारी पर हम विजय प्राप्त कर सकेंगे।विश्व पर्यावरण दिवस की सबको बधाई।
डॉ. सन्तोष कुमार मिश्र
श्री म. रा.दा. पी.जी.कालेज
भुड़कुड़ा, गाजीपुर।
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