Sunday, 10 November 2019

प्राच्यविद्या का सम्मान काशी का सम्मान है-भवानीनन्दन यति

                                                                         दो दिवसीय गान्धर्व महोत्सव का शुभारंभ महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनन्दन यति जी महाराज द्वारा कार्तिक मास में तेरस के दिन गंगा किनारे काशी केअस्सी घाट पर किया गया।यह कार्यक्रम गोयनका
फाउंडेशन, काशी द्वारा आयोजित किया गया है।उदघाट्न सत्र में वैदिक विद्वानों द्वारा वेद की ऋचाओं का शास्त्रीय पद्धति से वाचन किया गया।मुख्य अतिथि के रूप मेंअपने सम्बोधन में स्वामी भवानीनन्दन यति जी ने कहा कि न तो कोई श्रोता है न कोई वक्ता है।परमात्मा ही शव्द रूप में निकलता है और वही श्रवण भी करता है।वह सर्वत्र विद्यमान है।प्राच्य विद्या का सम्मान काशी का सम्मान है और विद्वानों का सम्मान बाबा विश्वनाथ के प्रति सम्मान है।वैदिक ज्ञान के संरक्षण हेतु गोयनका फाउंडेशन का कार्य प्रशंसनीय है।कार्यक्रम को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के आचार्य डॉ पातञ्जलि मिश्र तथा काशी विद्यापीठ के आचार्य राममूर्ति चतुर्वेदी ने भी सम्बोधित किया।महाराजश्री के करकमलों द्वारा पूर्व कुलपति प्रोफेसर वशिष्ट त्रिपाठी,प्रो. रामयज्ञ शुक्ल,प्रो. रेवा प्रसाद द्विवेदी(का.हिं. वि. वि.),प्रो.कमलाकांत त्रिपाठी सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, ब्रजचैतन्य जी महाराज एवं प्रख्यात चिकित्सक डॉ हेमन्त गुप्ता को अंगवस्त्रम व स्मृतिचिन्ह देकर सम्मानित किया गया।अभ्यागतों एवं सारस्वत मंच का अभिनंदन फाउंडेशन के सचिव डॉ. शुकदेव त्रिपाठी द्वारा किया गया।इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक श्रीमान रमेश जी,श्रीमान रामाशीष जी,डॉ मनोजकांत,क्षेत्र धर्म जागरण प्रमुख श्रीमान अभयनारायण जी एवंअसिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सन्तोष मिश्र सहित काशी विद्वत परिषद के लोग उपस्थित थे।कार्यक्रम का संचालन ध्रुपद गायिका डॉ अनुराधा रतूड़ी ने किया।

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