सामान्यतया मठ मंदिर में आमजन पूजापाठ या किसी धार्मिक अनुष्ठान के निमित्त उपस्थित होते हैं।लेकिन गाज़ीपुर जनपद के सिद्धपीठ हथियाराम मठ परिसर में आज लीक से हटकर आजाद हिंद फौज के सिपाही और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तिलकू प्रजापति के दिवंगत होने पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया और इसकी पहल स्वयं मठ के महन्थ महामण्डलेश्वर स्वामी भवानीनन्दन यति जी महाराज ने की।महाराजश्री ने अपने सम्बोधन में कहा कि देश को आजाद कराने में जिन लोगों ने अपनी भूमिका अदा की उनका स्थान सर्वोपरि है।तिलकू प्रजापति ने हथियाराम की माटी में जन्मलिया और नेताजी सुभाषचंद्र बोस से जुड़कर देश को आजाद कराने में श्रेष्ठ योगदान दिया।आज वे भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं लेकिन हमें उनपर गर्व है।हम कुछ भी हैं,देश पहले है।जिसने देशसेवा के लिए अपना जीवन खपाया हम उस ऋण को नहीं उतार सकते।समाज का जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमारा यह धर्म है कि ऐसी विभूतियों का हम पूण्य स्मरण करते रहें।देश और समाज को इससे प्रेरणा मिलती रहेगी।उन्होंने कहा कि जिन्हें आजादी का मतलब नहीं पता है वे प्रतिरोध की आड़ में आगजनी औरअराजकता में संलिप्त हैं।नागरिकता संशोधन कानून आजादी के समय हमसे बिछड़े और धार्मिक आधार पर प्रताड़ना झेल कर लौटे लोगों को नया जीवन देने की कोशिश है।हमें इस बात को समझना चाहिए।कार्यक्रम को डॉ. सन्तोष कुमार मिश्र,भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बृजेन्द्र रॉय, श्रीराम जायसवाल, डॉ. रमाशंकर आदि ने भी सम्बोधित कर श्रद्धांजलि अर्पित किया।

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