अंततः हम सब भारतवासियों का शदियों से बहुप्रतीक्षित वह स्वर्णिम व ऐतिहासिक क्षण आ ही गया जब सनातन धर्म और हमारी संस्कृति के प्रतीक मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में उनके भव्य मंदिर निर्माण का शुभारंभ आज होने जा रहा है। देश देशांतर में बसे राम के वंशजों के लिए यह एक ऐतिहासिक और आनन्ददायी क्षण है।इस दिवस को उत्सव की भांति मनाने की तैयारी जोरों पर है।भारतीय जनमानस में राम इस कदर रचे बसे हैं कि सोते जगते उठते बैठते राम नाम का उच्चारण सुनाई देता है।यहां तक कि पूजा पद्धति से मुस्लिम धर्म को मानने वाले आल्हा गायक राम के नाम का गुणानुवाद कुछ इस तरह से करते हैं-सारे नामों में हरि नाम बड़ा प्यारा है/राजा दशरथ का ललन राम बड़ा प्यारा है।राम के नाम की मंदिरा पीयो पीने वालों/राम के नाम का जाम बड़ा प्यारा है।इस गीत को सुनकर राम को धर्म विशेष से जोड़ना कल भी गलत था और आज भी गलत है।जिस भावना से यह गीत पीढ़ियों से गया जा रहा है उससे यह सिद्ध होता है कि भगवान राम प्रत्येक भारतीय के पूर्वज हैं। यूँ कहें कि जीव जगत के लिए राम नाम औषधि है तो गलत नहीं होगा। निर्विवाद रूप से राम नाम ही सत्य है और सन्देह से परे है।जो निराकार निर्गुण उपासक हैं उनके लिए भी राम नाम पूंजी है 'राम मोर पूंजिया मोर धना निसबासर लागल रहू रे मना' जो लोग सगुण के उपासक हैं राम उनके लिए विष्णु का अवतार हैं और मर्यादापुरुषोत्तम कहे जाते हैं।डॉ लोहिया कहते हैं कि "ऐ भारत माता हमें राम का कर्म और वचन दो।हमें असीम मस्तिष्क और उन्मुक्त ह्रदय के साथ -साथ जीवन की मर्यादा से रचो"।तातपर्य यह कि हर आम और खास के जीवन को भगवान राम का व्यक्तित्व प्रभावित करता आ रहा है और अनन्त काल तक करता रहेगा।ग़ांधी राम राज्य की कल्पना लेकर चलते हैं तो उनके शिष्य और कुजात गाँधीवादी कहे जाने वाले डॉ लोहिया का सपना सीता- राम -राज का था।सीताराम राज की परिकल्पना को लेकर उन्होंने अपने जीवन काल में रामायण मेला का आयोजन चित्रकूट में किया।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कोख से जन्मे राजनीतिक संगठन भारतीय जनता पार्टी के लिए राम मंदिर निर्माण के साथ ही रामराज्य की स्थापना परम लक्ष्य है। राम राम अभिवादन के रूप में भारतीय समाज में चलन में है तो वहीं जय श्री राम का उदघोष विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों में अजस्र ऊर्जा का संचार भी करता है।जूना अखाड़े के वरिष्ठ महामण्डलेश्वर और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े महन्थ भवानीनन्दन यति के अनुसार राम इस राष्ट्र का प्रतीक हैं ,सीता इस राष्ट्र की संस्कृति हैं ,लक्ष्मण इस देश का नागरिक और हनुमान सेना के सौर्य का प्रतीक हैं।राष्ट्र भारत मे आज ऐसा वतावरण तैयार हो चुका है कि मुस्लिम संगठनों की भावनाएं भव्य राममंदिर निर्माण के लिए व्यक्त हो रही हैं।मंदिर निर्माण का विरोध करने वाले आज अप्रासंगिक हो गए हैं।शिलान्यास और कार्य आरम्भ करने के मुहूर्त को लेकर की जा रही बेतुकी बयानबाजी पूर्णतया अर्थहीन है।तुलसी बाबा अपने ग्रन्थ श्रीरामचरितमानस में कहते हैं कि 'जाकी रही भावना जैसी....'राम के अस्तित्व को उस रूप में अंगीकार किया है ।कुल मिलाकर धर्मनिरपेक्ष और धर्मसापेक्ष दोनों चिंतन के केंद्र में राम विराजमान हैं।राम अमीर और गरीब सबके हैं तभी उनको 'गरीब नेवाजू' कहा जाता है।निर्गुनिया सन्त बूला साहेब जनभाषा में कहते हैं कि 'हमरे त राजा राम संघाती'। मंदिर निर्माण कार्यारम्भ के अवसर पर संम्पूर्ण देशवासियो को शुभकामना और अंत में 'सियाराम मय सब जग जानी, करउँ प्रणाम जोरि जुग पानी।
डॉ. सन्तोष कुमार मिश्र
असिस्टेन्ट प्रोफेसर, अंग्रेजी
पी. जी.कालेज,भुड़कुड़ा, गाजीपुर

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